‘वंदे मातरम्’ केवल भारत का राष्ट्रगीत नहीं है। यह आधुनिक भारत के इतिहास का ऐसा सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रतीक है, जिसमें स्वतंत्रता, आत्मसम्मान, मातृभूमि और सभ्यतागत चेतना - चारों एक साथ दिखाई देते हैं। आज जब वंदे मातरम् अपनी रचना के 150 वर्ष पूरे कर चुका है, तब इसके इतिहास को केवल एक गीत के रूप में नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना के विकास की यात्रा के रूप में समझने की आवश्यकता है। यह वह गीत है जिसने औपनिवेशिक शासन के सामने भारतीयों के आत्मविश्वास को स्वर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन की अनेक पीढ़ियों को प्रेरित किया। 2025 में इसके 150 वर्ष पूरे होने पर भारत सरकार ने वर्षभर चलने वाले राष्ट्रीय स्मरणोत्सव की शुरुआत की, जिसमें इसके पूर्ण स्वरूप के सामूहिक गायन का भी आह्वान किया गया। वंदे मातरम् केवल भारत का राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि अविभाजित भारत के आधुनिक इतिहास का सबसे शक्तिशाली और वैचारिक रूप से संवेदनशील प्रतीक है। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में जन्मा यह गीत ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ प्रतिरोध की सबसे बुलंद आवाज बना और क्रांतिकारियों के लिए मूलमंत्र बन गया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 ...
Political Talk में राजनीति, नीति, समाज और समकालीन घटनाओं का विश्लेषण राजनीतिक सिद्धांत और भारतीय दृष्टिकोण से किया जाता है।