राम नवमी के पावन अवसर पर जब 108 ब्राह्मण बटुकों के स्वस्ति-वाचन, सात शंखनादों की गूंज और बौद्ध भिक्षुओं द्वारा अष्टमंगल पाठ के बीच बलेन्द्र शाह ने नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, तो यह केवल एक औपचारिक राजनीतिक घटना नहीं रही बल्कि इसने नेपाल की स्थापित राजनीतिक परंपराओं और धारणाओं को बदल दिया। वैदिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक प्रतीकों से परिपूर्ण इस शपथग्रहण ने हिन्दू राजनीति के उस विमर्श को पुनर्जीवित कर दिया, जो लंबे समय से नेपाल की राजनीति के हाशिये पर चला गया था। यह दृश्य बताता है कि नेपाल एक बार फिर अपनी राजनीतिक संरचना में हिन्दू मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है। यह घटनाक्रम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि 2006 के बाद नेपाल के संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में पुनर्परिभाषित होने और धर्मनिरपेक्षता को शासन का अभिन्न तत्व बनाकर वामपंथी दलों के प्रभुत्व ने एक ऐसी राजनीतिक छवि निर्मित की, जिसमें हिन्दू प्रतीकों और वैदिक परंपराओं की भूमिका सीमित होती गई। ऐसे में, इस प्रकार का शपथग्रहण केवल एक सांस्कृतिक संकेत नही...
मध्य पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध के भंवर में खड़ा है। इजराइल और ईरान के बीच वर्षों से चल रहा परोक्ष संघर्ष अब प्रत्यक्ष सैन्य टकराव में बदल चुका है। 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के संयुक्त अभियान से ईरान में बहुत नुकसान हो चुका है। इस सैन्य संघर्ष के पहले दिन ही ईरानी सर्वोच्च नेता खामेनेई मारे गए। ऐसे समय में भारत की संयमित प्रतिक्रिया को लेकर देश के भीतर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। विपक्ष का मत है कि खामेनेई की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए भारत को ईरान के साथ स्पष्ट रूप से खड़ा होना चाहिए जबकि भारत सरकार ने इस पूरी घटना पर कोई बयान नहीं दिया है। यहाँ यह समझना आवश्यक है कि क्या यह चुप्पी है या परिपक्व कूटनीतिक रणनीति ? मध्य पश्चिम एशिया में इजराइल और ईरान के बीच तनाव दशकों पुराना है , जिसकी जड़ें क्षेत्रीय सुरक्षा , वैचारिक टकराव और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी आशंकाओं में निहित हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर इजराइल और अमेरिका लंबे समय से गंभीर आशंकाएँ व्यक्त करते रहे हैं। अक्टूबर 2023 में इजराइल पर हमास के हमले और उसके बाद गाजा पट्टी में इस्राइली सैन्य अभियान ने क्षेत्रीय समी...